कायनात में आए हो तो अच्छे मेज़बान बनो

कायनात में आए हो तो अच्छे मेज़बान बनो, मेहमान तो कल तुम्हें दुनिया बना देगी। अदब से मिलो हर मुसाफ़िर से इस जहाँ में, न जाने कौन-सा शख़्स कब विदा…

कायनात में आए हो तो अच्छे मेज़बान बनो,
मेहमान तो कल तुम्हें दुनिया बना देगी।

अदब से मिलो हर मुसाफ़िर से इस जहाँ में,
न जाने कौन-सा शख़्स कब विदा हो जाए।

कुछ इस तरह से गुज़रो कि निशाँ रह जाए,
तुम्हारे बाद भी तुममें कोई जहाँ रह जाए।

हिसाब दौलत का नहीं, दिल का रखा जाएगा,
किसे रुलाया, किसे हँसाया—ये पूछा जाएगा।

जो पेड़ तुमने लगाया, उसकी छाँव कौन लेगा,
तुम्हारे बाद भी कोई उस फ़र्ज़ को निभाएगा।

ज़रा नरमी से मिलो इस ख़ाक के मुसाफ़िर से,
किसे ख़बर है कौन कल कहाँ चला जाएगा।

By Ajay Gautam

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Ajay Gautam

Ajay Gautam Advocate: Lawyer, Author, Columnist and Poet, Founder of OnlineNewsPortal.In and MediumPulse.com