यह कोर्ट नहीं है कि दलीलों से फ़ैसला बदल जाएगा,
तुम वक़्त ज़ाया कर रहे हो, वफ़ाओं की बात करके।
अब छोड़ दिया है हमने भी वफ़ा का ज़िक्र करना,
लोग मोहब्बत तो सीख लेते हैं, मगर निभाना भूल जाते हैं।
कुछ रिश्ते मुक़दमे नहीं होते कि दलीलों से बच जाएँ,
जहाँ फ़ैसला हो चुका हो, वहाँ सफ़ाइयाँ बेअसर होती हैं।
By Ajay Gautam
