हमने ख़ामोशी को भी किरदार बना रखा है

हमने ख़ामोशी को भी किरदार बना रखा है, लोग समझते हैं कि हमें कोई शिकायत नहीं। तेरी यादों का भी अपना एक शहर है मुझमें, जहाँ हर रास्ता जाता है,…

हमने ख़ामोशी को भी किरदार बना रखा है,
लोग समझते हैं कि हमें कोई शिकायत नहीं।

तेरी यादों का भी अपना एक शहर है मुझमें,
जहाँ हर रास्ता जाता है, मगर लौटता नहीं।

हमारी ख़ामोशी को कमज़ोरी मत समझ लेना,
समंदर अक्सर किनारों से कम बोलता है।

हम बदलते नहीं मौसम के बदल जाने से,
बस कुछ चेहरे नज़र आने बंद हो जाते हैं।

अब आईना भी मुझसे सवाल करता है,
“तू सबको समझता है, ख़ुद को कब समझेगा?”

ज़िंदगी ने एक बात बड़े सलीके से सिखाई,
हर अपना हमेशा अपना नहीं रहता।

जो बात आँखों ने कही, लफ़्ज़ कह न पाए कभी,
वही ख़ामोशियाँ उम्र भर याद रहती हैं।

मेरी तन्हाई से पूछो मेरा हाल-ए-दिल,
भीड़ में रहकर भी जो मेरा साथ देती है।

By Ajay Gautam

Share: f X in @

Ajay Gautam

Ajay Gautam Advocate: Lawyer, Author, Columnist and Poet, Founder of OnlineNewsPortal.In and MediumPulse.com