नज़र नज़र में ही अपनों का पता चलता है,
नज़र नज़र से ही सपनों का पता चलता है।
नज़र ही इंसान की पहचान बनती है,
नज़र ही हर दिल की ज़ुबान बनती है।
नज़र नज़र में तूफ़ान दबा लगता है,
नज़र नज़र में ही एहसास दवा लगता है।
नज़र नज़र से ही अवतार बना करते हैं,
नज़र नज़र में ही शैतान पला करते हैं।
नज़र ही दिल की ख़ामोश ज़ुबान बनती है,
नज़र ही रिश्तों की पहचान बनती है।
कहीं ये प्रेम का पहला इकरार होती है,
कहीं यही नफ़रत की दीवार होती है।
नज़र से ही विश्वास जन्म लिया करता है,
नज़र से ही हर संशय मिटा करता है।
नज़र अगर झुके तो विनम्रता बोलती है,
नज़र अगर उठे तो वीरता डोलती है।
नज़र में करुणा हो तो जग मुस्काता है,
नज़र में छल हो तो घर भी पराया होता है।
नज़र ही पैगाम बया करती है,
और नज़र ही जीवन की कहानी कहती है।
नज़र का रंग बदलते ही तक़दीर बदल जाती है,
सूखी धरती भी सावन में ढल जाती है।
जिसकी नज़र में मानवता का प्रकाश रहता है,
उसके जीवन में हर पल ईश्वर का वास रहता है।
By Ajay Gautam
