News And Articles To Read

तेरे इंतज़ार में।

आँखें, चेहरा, आईना और शहर,
कुछ धुंधले से पड़ गए हैं, तेरे इंतज़ार में।

वो आख़िरी मुलाक़ात, वो ज़िद्दी कसम,
दम तोड़ने को है, तेरे इंतज़ार में।

दफ़्न ख़्वाब अब फिर साँसें लेने लगे हैं,
फ़िज़ा भी फिर आबाद होने लगी है, तेरे इंतज़ार में।

आधी तो गुज़र गई, मगर पूरी नहीं जाती,
तेरी याद और ये उम्र, तेरे इंतज़ार में।

By Ajay Gautam