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वो लौटकर बेजोड़ आया है, एक था, हज़ार बनकर आया है।

वो लौटकर बेजोड़ आया है,
एक था, हज़ार बनकर आया है।

टूटा हुआ दिल ही नहीं,
साथ में काँच की धार भी लाया है।

उसे कमज़ोर समझने की भूल मत करना,
वो दर्द को हथियार बनाकर आया है।

जिसे समझा था तुमने ख़त्म कभी,
वो अपनी नई पहचान बनाकर आया है।

By Ajay Gautam