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गर मेरी ख़ामियाँ भी नज़रअंदाज़ करना क़ुबूल है

गर मेरी ख़ामियाँ भी नज़रअंदाज़ करना क़ुबूल है,
तो आज ही कह दे—क़ुबूल है, क़ुबूल है, क़ुबूल है।

By Ajay Gautam