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अक्स तो है, आईने में, मैं कहा हूँ, ढूँढता फिरता हूँ खुद को, मैं कहाँ हूँ। सांसें चलती हैं, ज़माना देखता है, ज़िंदगी तो है, पर मैं कहाँ हूँ।

अक्स तो है, आईने में, मैं कहा हूँ,
ढूँढता फिरता हूँ खुद को, मैं कहाँ हूँ।
सांसें चलती हैं, ज़माना देखता है,
ज़िंदगी तो है, पर मैं कहाँ हूँ।

By Ajay Gautam