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जब मोहब्बत जुदा होकर, ढल सी गयी, दिल धड़कता है क्यों ये तेरे नाम से।

जब मोहब्बत जुदा होकर, ढल सी गयी,
दिल धड़कता है क्यों ये तेरे नाम से।
जुड़ा कुछ तो है, अब तक दरमियाँ,
जाम उठता तो है, पर तेरी याद में।

जब तेरी आहट का भी इंतज़ार न है,
क्यों फ़िज़ा दस्तक देती मेरे कान में।
तू दूर है, दिल ये मानता नहीं,
हर साँस चल रही है इंतजार में।

ये गलियाँ अब भी पता पूछती,
क्या कह दूँ इन्हे, तू एक ख्वाब है।
बुझ गए हैं चिराग़ सारे इस दिल के मगर,
कुछ जुगनू है जो हार मानते नहीं।

चाँद भी थम गया, तन्हाई में,
कहता है, रुकता हूँ इस ख्याल में।
लाख कोशिशें कीं वक़्त ने मगर,
पर आदत न गई तुझे चाहने की।

जो सज़ा मिल रही है, मुस्कुराने की,
लोग अंजाम कहते हैं, इसको इधर।
ज़िक्र रहता है, खामोश दुआओं में,
दिल धड़कता है, जब ये तेरे नाम से।

गर कभी लौट आओ, ये मुमकिन नहीं,
क्यों नहीं सूखते, जख्म इस बात से।
थाम लेना मेरा हाथ, जो मुमकिन नहीं,
बस पहचान लेना, तुम थोड़ी दूर से।

मोहब्बत जुदा होकर, ढल सी गयी,
फिर भी रूह जुड़ी है तेरे एहसास से।
दिल धड़कता रहेगा उम्र भर यूँ ही,
इश्क़ नहीं जाता किसी के जाने से।

By Ajay Gautam