तुम्हें पाने की ज़िद होती तो दुनिया से लड़ जाते,
तुम्हें बाँधने की कभी कोई आरज़ू ही नहीं थी।
न तुम पर कोई इल्ज़ाम, न अपने प्यार का दावा,
बस इतना है कि तेरे बाद भी दिल ने तुझे चाहा।
वक़्त ने छीन लिए हमसे कई अपने चेहरे,
मगर तेरी याद ने अब तक मेरा घर संभाला है।
जो आज तुम्हें मेरी ख़ामोशी समझ नहीं आती,
कभी तन्हाई में बैठोगे तो आवाज़ सुनाई देगी।
तुम्हारे लौटने की उम्मीद भी अब कैसी उम्मीद,
हमारे हिस्से में बस इंतज़ार ही आया।
मैंने चाहा है तुम्हें, तुम्हारी ख़ुशी की तरह,
याद रखना, कोई शख़्स तुम्हें अब भी दुआ देता है।
मोहब्बत हार भी जाए तो मोहब्बत रहती है,
किसी के दूर चले जाने से इश्क कम नहीं होता।
By Ajay Gautam
