तुम ही चलोगे जब ये चाल,
क्या विदेशी करेंगे इनका हाल।
कुछ लोग करते हैं विदेशों में,
तुम घरों में ही गद्दारी करते हो।
क्या इन्हें नहीं हक़ जीने का,
स्वच्छ हवा और पानी पीने का।
प्रकृति तुम्हारी मिल्कियत नहीं,
सिर्फ़ दोहन तुम्हारा अधिकार नहीं।
संसाधनों को लूट रहे हो,
जैसे यह कोई उपनिवेश हो।
धरती को छलनी करने वालो,
कल हत्यारे कहलाओगे।
धन-दौलत सब यहीं रह जाएगी,
साँसें भी एक दिन थम जाएँगी।
धरती बची तो पीढ़ियाँ बचेंगी,
वरना कहानियाँ ही रह जाएँगी।
इतिहास को भूलने वाले,
सत्ता का अहंकार न कर।
तू अनंत और अंतिम नहीं,
इसी माटी की धूल है।
By Ajay Gautam
