दोस्ती यह नहीं कि ग़ैरों की सोहबत छोड़ दो,
दोस्ती वो है कि दोस्त की तौहीन न सुन सके।
महफ़िल में लाख लोग हों, मगर बात इतनी हो,
कोई दोस्त को छोटा कहे, तो दोस्त चुप न रह सके।
रिश्ते सिर्फ़ साथ बैठने से नहीं, भरोसे से बनते हैं,
दोस्ती तो यह है कि कोई ग़ैर, दोस्त की तौहीन न कर सके।
By Ajay Gautam
