न धन चाहिए, न कोई उपहार चाहिए,
बहन को बस भाई का सदा प्यार चाहिए।
दूरियाँ चाहे कितनी भी रिश्तों के दरमियाँ हों,
राखी के धागे में हमेशा वही पुरानी मिठास हो।
राखी में बंधा धागा जब कलाई को छूता है,
भाई-बहन के दिल में बचपन फिर से मुस्कुराता है।
एक धागे में सिमट जाती हैं हजारों यादें,
रक्षा बंधन पर फिर से महक उठता है बचपन।
By Ajay Gautam
