मध्य प्रदेश सरकार ने शासन संधारित मंदिरों के पुजारियों के मानदेय में की वृद्धि, भूमि के आधार पर तय हुई नई व्यवस्था
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार के धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग ने शासन संधारित मंदिरों के पुजारियों एवं सेवादारों के मानदेय में वृद्धि का आदेश जारी किया है। आदेश क्रमांक एफ.-7-13/2018/6 दिनांक 26 मई 2022 के अनुसार, राज्य सरकार ने वर्ष 2018 के पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए नई मानदेय व्यवस्था लागू की है।
नई व्यवस्था के तहत जिन शासन संधारित मंदिरों के पास कृषि भूमि नहीं है, वहां के पुजारियों को अब ₹5,000 प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ऐसे मंदिरों के पुजारियों को बेहतर आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना बताया गया है। यह प्रावधान आदेश के प्रमुख बदलावों में शामिल है।
आदेश में मंदिरों के पास उपलब्ध कृषि भूमि के आधार पर अलग-अलग मानदेय निर्धारित किया गया है। जिन मंदिरों के पास 5 एकड़ तक कृषि भूमि है, उनके पुजारियों को ₹2,500 प्रतिमाह, जबकि 5 से 10 एकड़ तक भूमि वाले मंदिरों के पुजारियों को ₹2,000 प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 10 एकड़ से अधिक कृषि भूमि वाले शासन संधारित मंदिरों के पुजारियों को शासन की ओर से अलग से कोई मानदेय नहीं दिया जाएगा। इससे यह संकेत मिलता है कि पर्याप्त कृषि आय वाले मंदिरों को सरकारी मानदेय के दायरे से बाहर रखा गया है।
आदेश के अनुसार यह नई व्यवस्था 1 मई 2022 से प्रभावशील मानी जाएगी। आदेश मध्यप्रदेश शासन के धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि संबंधित विभागों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और अन्य अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
