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ये नदी, ये हवा, ये शाम, ये तन्हाई, सब अच्छे हैं, मगर तुम साथ हो तो क्या कहने।

ये नदी, ये हवा, ये शाम, ये तन्हाई,
सब अच्छे हैं, मगर तुम साथ हो तो क्या कहने।

फूल, ख़ुशबू, चाँदनी, बारिश—सब सुहाने हैं,
मगर इन आँखों को सबसे अच्छे तुम लगते हो।

ज़िंदगी ने बहुत रंग दिखाए हैं अब तक,
एक तुम्हारा रंग है जो उतरता ही नहीं।

बहुत कुछ है इस दुनिया में देखने के लिए,
मगर मेरी नज़र को तुम्हारे सिवा क्या चाहिए।

ये बारिश, ये मिट्टी, ये भीगी हुई शाम,
सबका अपना नशा है—तुम्हारा अपना मुक़ाम।

तेरी हँसी में जैसे बहारों का राज़ है,
तू सामने हो तो हर मौसम गुलाब है।

चाँद भी ठहर जाए तेरी एक झलक पर,
मेरी नज़र में तुझसे हसीं कुछ भी नहीं।

तू पास हो तो धड़कनें भी शायरी बनें,
तू दूर हो तो लफ़्ज़ भी अधूरे-अधूरे लगें।

By Ajay Gautam