हक़ जताकर किसी को रोक लेना महज़ एक ज़िद है,
इश्क़ तो वो है जो उसे किसी और का होने ही न दे।
मोहब्बत में हक़ जताना तो हर कोई जानता है,
इश्क़ तो वो है जहाँ बिना कहे भी दिल सिर्फ़ तुम्हारा रहे।
किसी को बाँधकर रखना मोहब्बत नहीं होती,
इश्क़ तो वो है जहाँ दिल ख़ुद किसी और का होना भूल जाए।
रोक लेने से कोई अपना नहीं होता,
इश्क़ तो वो है जहाँ जाने की चाह ही ख़त्म हो जाए।
ज़िद करके किसी को पास रखना आसान है,
इश्क़ तो वो है जो दूर होकर भी किसी और के क़रीब न होने दे।
मोहब्बत में सवाल बहुत होते हैं,
इश्क़ में बस एक यक़ीन होता है—तुम मेरे हो।
किसी के कदम रोकना तो महज़ एक हक़ है,
इश्क़ तो वो है जो उसके दिल में अपना घर बना ले।
साथ रहने की कसमें तो हर कोई खाता है,
इश्क़ तो वो है जो जुदाई में भी किसी और को जगह न दे।
किसी को अपना कह देना मोहब्बत नहीं,
इश्क़ तो वो है जिसे देखकर दिल को किसी और की तलाश न रहे।
मोहब्बत चाहती है कि तुम मेरे पास रहो,
इश्क़ चाहता है कि तुम्हारे दिल में मेरे सिवा कोई और न रहे।
By Ajay Gautam
