आदर, सहूलियत, मदद और उपहार,
ये रिश्तों की EMI हैं।
इन्हें समय पर भरते रहो,
तभी अपनापन कायम रहता है।
जो केवल लेने की आदत रखते हैं,
उनके रिश्ते धीरे-धीरे कर्ज़ बन जाते हैं।
जो देने का सुख समझते हैं,
उनके अपने कभी कम नहीं होते।
रिश्ते शब्दों से नहीं,
छोटे-छोटे व्यवहारों से निभते हैं।
सम्मान उनकी पूँजी है,
और विश्वास उनका ब्याज।
किश्तें चूक जाएँ तो शिकायतें बढ़ती हैं,
दूरी भी धीरे-धीरे घर कर जाती है।
इसलिए आदर, सहूलियत, मदद और उपहार—
ये रिश्तों की EMI हैं,
इन्हें उम्र भर मुस्कुराकर चुकाते रहिए।
By Ajay Gautam
