तेरे आने की ख़बर से ही महकता है मकाँ,
तू मिले तो जैसे मौसम को बहाना मिल जाए।
हम मिले तो लफ़्ज़ कम और आँखें ज़्यादा बोलती रहीं,
वो मुलाक़ात आज भी दिल में पूरी बातचीत है।
एक मुलाक़ात में उसने अपना बना लिया,
हम उम्र भर उसी एहसास को निभाते रहे।
कभी-कभी एक मुलाक़ात ही काफ़ी होती है,
किसी अजनबी को उम्र भर का अपना बनाने के लिए।
हम उस मुलाक़ात को कैसे भुला दें,
जहाँ तुम मिले थे और वक़्त ठहर गया था।
फिर किसी मोड़ पर मिलेंगे, ये कहकर वो चला गया,
हम आज तक उसी मोड़ को अपना आशियाँ समझते हैं।
तेरी एक नज़र से जो रिश्ता बन गया,
वो बरसों की पहचान से भी गहरा निकला।
तुम्हें देखकर दिल ने बस इतना कहा,
यही वो चेहरा है जिसका इंतज़ार था।
वो मिला तो शहर वही था, रास्ते वही थे,
मगर उसके बाद दुनिया कुछ और लगने लगी।
एक छोटी-सी मुलाक़ात ने कमाल कर दिया,
जो दिल ख़ाली था उसे ख़यालों से भर दिया।
तेरे साथ गुज़रे कुछ पल इतने ख़ास थे,
अब अकेलेपन में भी वही पल साथ रहते हैं।
जाने क्यों हर बार मुलाक़ात अधूरी रहती है,
दिल की बात होठों तक आते-आते दूर हो जाती है।
वो मिलने आया था कुछ देर के लिए,
और दिल में अपनी पूरी उम्र छोड़ गया।
अगर अगली मुलाक़ात मुक़द्दर में नहीं भी हो,
तो पहली मुलाक़ात की याद कम नहीं होगी।
मुलाक़ात का सिलसिला यूँ ही चलता रहे,
तुम मिलते रहो और दिल मोहब्बत करता रहे।
By Ajay Gautam
