तेरी मिट्टी का कर्ज़ है मुझ पर,
साँस-साँस तेरा नाम रहे।
जब तक धड़कन साथ निभाए,
भारत तेरा मान रहे।
माथे पर तिरंगा सजाकर,
हर मुश्किल से लड़ जाऊँ।
तेरी ख़ातिर ऐ मेरी धरती,
हँसते-हँसते मिट जाऊँ।
तूफ़ानों से आँख मिलाकर,
हमने दीप जलाए हैं।
माँ, तेरी पावन धरती पर,
जीवन-स्वप्न सजाए हैं।
तेरी ख़ातिर हर इक साँस का,
हमने मान निभाया है।
तेरी रक्षा के पथ पर चलना,
जीवन का सौभाग्य पाया है।
जब-जब सीमा ने पुकारा,
हमने कदम बढ़ाए हैं।
सीने पर इतिहास लिखा है,
पीठ कभी न दिखाए हैं।
तेरी मिट्टी का कर्ज़ है मुझ पर,
साँस-साँस तेरा नाम रहे।
जब तक धड़कन साथ निभाए,
भारत तेरा मान रहे।
तेरे पर्वत मेरी हिम्मत हैं,
तेरी नदियाँ मेरी जान।
तेरे खेतों की हरियाली में,
बसता मेरा हिन्दुस्तान।
तेरी बोली, तेरी खुशबू,
मेरी हर पहचान रहे।
जन-जन का विश्वास अमर हो,
तेरी ऊँची शान रहे।
सीमा पर जो दीप जलें तो,
उनमें मेरा भी नूर रहे।
वीरों के हर त्याग की गाथा,
पीढ़ी-पीढ़ी मशहूर रहे।
अगर कभी यह जीवन माँगे,
मैं मुस्काकर दे दूँगा।
तेरी ख़ातिर अपने सपनों का,
हर रंग तुझमें भर दूँगा।
तेरी नदियों का संगीत बनूँ,
तेरे पर्वत का अभिमान बनूँ।
तेरे खेतों की हरियाली में,
मेहनत की पहचान बनूँ।
तेरे मंदिर की आरती बनूँ,
मस्जिद की दुआ बन जाऊँ।
गुरुद्वारे की सेवा बनकर,
हर दिल की वफ़ा बन जाऊँ।
माँ, तेरी हर मुस्कान रहे,
हर बच्चे की आस रहे।
जब तक सूरज-चाँद चमकें,
तेरा ऊँचा विश्वास रहे।
यदि कभी मेरा नाम मिटे,
कोई शिकवा न होगा फिर।
बस इतना लिख देना मुझ पर—
“वतन पर अर्पित हुआ यह सिर।”
तेरी मिट्टी की सौंधी खुशबू,
मेरी रग-रग में बसती है।
जीवन तुझसे शुरू हुआ था,
तुझमें ही हर धड़कन हँसती है।
जब अंतिम साँसें आएँगी,
बस इतनी सी दरकार रहे—
मेरा तन तेरी धरती को,
मेरा मन तेरा प्यार कहे।
जय-जय भारत, जय-जय धरती,
तेरा यश अमर-अटल रहे।
साँस रहे या साँस न रहे,
बस तेरा सम्मान रहे।
By Ajay Gautam
