कुछ ख़त ऐसे भी होते हैं,
जिन्हें डाक नहीं पहुँचाती,
वक़्त ख़ुद उन्हें
दिल के पते पर छोड़ जाता है।
तुमने शायद मेरी तस्वीरें मिटा दी होंगी,
मगर यादों से मेरा चेहरा
कहाँ मिटा पाए होंगे।
कभी न कभी,
आख़िरी बार मेरा नाम
तुम्हारी ज़ुबाँ पर भी आया होगा,
और तुमने मुस्कुराने की
एक झूठी-सी कोशिश की होगी।
कुछ आवाज़ें
लौटकर नहीं आतीं,
क्योंकि बिछड़ना
सिर्फ़ लोगों से नहीं होता,
कभी-कभी इंसान
अपनी ही हँसी से भी
जुदा हो जाता है।
मैंने आज भी
तुम्हारे नाम का एक ख़्वाब
बारिश में भीगने के लिए
संभालकर छोड़ रखा है,
शायद किसी दिन
उसकी ख़ुशबू तुम्हें
मेरी याद दिला दे।
मोहब्बत का भी
अजीब उसूल है—
जिसे हम
पूरी तरह अपना न सके,
उसे
उम्र भर
भुला भी नहीं सके।
By Ajay Gautam
