शासन संधारित मंदिरों की कृषि भूमि प्रबंधन व्यवस्था में बड़ा बदलाव, पुजारियों को 10 एकड़ तक की आय रखने की अनुमति
भोपाल। मध्य प्रदेश शासन के धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग ने शासन संधारित मंदिरों की कृषि भूमियों के प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। आदेश क्रमांक एफ-7-13/2018/छ: दिनांक 22 अप्रैल 2023 के माध्यम से वर्ष 2018 के पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए मंदिरों की कृषि भूमि से होने वाली आय के उपयोग संबंधी नई व्यवस्था लागू की गई है।
नए आदेश के अनुसार, जिन शासन संधारित मंदिरों के पास 10 एकड़ तक कृषि भूमि संलग्न है, उस भूमि से होने वाली संपूर्ण आय का उपयोग संबंधित पुजारी स्वयं अपने लिए कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य ऐसे पुजारियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और उनके मानदेय पर निर्भरता कम करना बताया गया है।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन मंदिरों के पास 10 एकड़ से अधिक कृषि भूमि है, वहां केवल पहले 10 एकड़ की आय का उपयोग पुजारी स्वयं कर सकेंगे। शेष कृषि भूमि का प्रबंधन जिला कलेक्टर की निगरानी में पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। अतिरिक्त भूमि को आवश्यकतानुसार नीलामी पर दिया जाएगा तथा उससे प्राप्त समस्त आय संबंधित मंदिर के बैंक खाते में जमा कराई जाएगी।
राज्य सरकार ने इस व्यवस्था को मंदिरों की संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, आय में पारदर्शिता और धार्मिक संस्थानों के वित्तीय संसाधनों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। इससे बड़ी कृषि भूमि वाले मंदिरों की अतिरिक्त आय सीधे मंदिरों के विकास एवं रखरखाव के लिए उपलब्ध हो सकेगी।
आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसकी प्रतिलिपि सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों, संबंधित विभागों तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक अनुपालन के लिए भेजी गई है।
शासन संधारित मंदिरों की कृषि भूमियों के प्रबंधन के संबंध में
