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एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: निजी मंदिरों के प्रबंधन में सरकार का कोई अधिकार नहीं, सुप्रीम कोर्ट के 2021 फैसले की सीमाएं भी कीं स्पष्ट

एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: निजी मंदिरों के प्रबंधन में सरकार का कोई अधिकार नहीं, सुप्रीम कोर्ट के 2021 फैसले की सीमाएं भी कीं स्पष्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने निजी मंदिरों के प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार का निजी मंदिरों के दैनिक प्रबंधन में कोई अधिकार नहीं है और राजस्व अभिलेखों में कलेक्टर को प्रबंधक (Manager) के रूप में दर्ज नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि यदि मंदिर निजी है, तो उसकी संपत्ति के संबंध में सरकार केवल प्रशासनिक नियंत्रण के नाम पर हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

यह फैसला रमाकांत तिवारी बनाम मध्य प्रदेश राज्य (W.P. No. 1737/2011) में 16 जून 2026 को दिया गया। मामले में याचिकाकर्ता ने राजस्व रिकॉर्ड में निजी मंदिर की भूमि पर कलेक्टर का नाम प्रबंधक के रूप में दर्ज किए जाने को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि निजी मंदिरों में ऐसी प्रविष्टियां कानून के अनुरूप नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट के 2021 फैसले की व्याख्या

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के 6 सितंबर 2021 के निर्णय The State of Madhya Pradesh vs. Pujari Utthan Avam Kalyan Samiti का विस्तृत उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह अवश्य स्पष्ट किया था कि पुजारी मंदिर की संपत्ति का मालिक नहीं बल्कि केवल प्रबंधक होता है तथा मंदिर की संपत्ति का वास्तविक स्वामी देवता (Deity) होता है। साथ ही, सरकार मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा के लिए प्रशासनिक निर्देश जारी कर सकती है।

हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का अर्थ यह नहीं है कि सरकार प्रत्येक निजी मंदिर के प्रबंधन का अधिकार अपने हाथ में ले सकती है या प्रत्येक मामले में कलेक्टर को प्रबंधक घोषित कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा और राजस्व रिकॉर्ड में पुजारियों के स्वामित्व संबंधी दावों तक सीमित था।

निजी और सार्वजनिक मंदिरों में स्पष्ट अंतर

हाईकोर्ट ने कहा कि निजी (Private) और सार्वजनिक (Public) मंदिरों के बीच कानूनी अंतर को समझना आवश्यक है। यदि कोई मंदिर निजी है, तो उसके प्रबंधन का अधिकार संस्थापक, उसके उत्तराधिकारियों अथवा वैध प्रबंधकों के पास रहेगा। केवल सरकारी परिपत्रों के आधार पर कलेक्टर का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करना कानूनसम्मत नहीं है।

अदालत ने यह भी दोहराया कि देवता एक विधिक व्यक्तित्व (Juristic Person) हैं, इसलिए भूमि का स्वामित्व देवता के नाम रहेगा, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि सरकार स्वतः मंदिर का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकती है।

कलेक्टर को लेकर हाईकोर्ट का निर्देश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि सभी जिलों के कलेक्टरों को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुरूप आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। प्रत्येक मामले में पहले यह निर्धारित किया जाए कि संबंधित मंदिर सार्वजनिक है या निजी। यदि मंदिर निजी पाया जाता है, तो:

  • राजस्व रिकॉर्ड में केवल देवता (Deity) का नाम भूमि स्वामी के रूप में दर्ज रहेगा।
  • कलेक्टर का नाम प्रबंधक या मैनेजर के रूप में दर्ज नहीं किया जाएगा।
  • सरकार निजी मंदिरों के दैनिक प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
  • मंदिर की संपत्ति का संरक्षण कानून के अनुसार किया जाएगा, लेकिन प्रबंधन का अधिकार निजी पक्षों के पास रहेगा।

स्वामित्व विवाद पर क्या कहा?

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भूमि के निजी मंदिर की संपत्ति होने या उसके स्वामित्व को लेकर विवाद उत्पन्न होता है, तो उसका निर्णय दीवानी न्यायालय (Civil Court) करेगा। ऐसे जटिल स्वामित्व विवादों का निस्तारण रिट याचिका के माध्यम से नहीं किया जा सकता।

फैसले का कानूनी महत्व

यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसने सुप्रीम कोर्ट के 2021 के फैसले की सही व्याख्या करते हुए यह स्पष्ट किया कि पुजारी को स्वामित्व अधिकार नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि राज्य सरकार निजी मंदिरों के प्रबंधन की अधिकारिणी बन जाती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार का अधिकार केवल कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं तक है, जबकि निजी मंदिरों का प्रबंधन उनके संस्थापकों, उत्तराधिकारियों या वैध प्रबंधकों के अधीन रहेगा।

इस प्रकार, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह स्थापित किया कि निजी मंदिरों के प्रबंधन में राज्य का कोई स्वतः अधिकार नहीं है और केवल राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर कलेक्टर को मंदिर का प्रबंधक नहीं बनाया जा सकता, जबकि सुप्रीम कोर्ट के 2021 के निर्णय के अनुसार देवता ही मंदिर की संपत्ति के विधिक स्वामी हैं और पुजारी मात्र उसके प्रबंधक होते हैं।

MP High Court: State Has No Role in Managing Private Temples, Collector Cannot Be Named Manager in Revenue Records. Govt Cannot Interfere In Management Of Private Temples: MP High Court. The Madhya Pradesh High Court has made it clear that the government cannot interfere in the management of a private temple. Madhya Pradesh High Court: Ramakant Tiwari vs The State Of Madhya Pradesh on 16 June, 2026 WRIT PETITION No. 1737 of 2011. Supreme Court of India: The State Of Madhya Pradesh vs Pujari Utthan Avam Kalyan Samiti on 6 September, 2021 CIVIL APPEAL NO. 4850 OF 2021 (ARISING OUT OF SLP (CIVIL) NO. 33675 OF 2017)

Supreme Court of India: The State Of Madhya Pradesh vs Pujari Utthan Avam Kalyan Samiti on 6 September, 2021 CIVIL APPEAL NO. 4850 OF 2021 (ARISING OUT OF SLP (CIVIL) NO. 33675 OF 2017)

The State Of Madhya Pradesh vs Pujari Utthan Avam Kalyan Samiti on 6 September, 2021 CIVIL AP

Madhya Pradesh High Court: Ramakant Tiwari vs The State Of Madhya Pradesh on 16 June, 2026 WRIT PETITION No. 1737 of 2011

Ramakant Tiwari vs The State Of Madhya Pradesh on 16 June, 2026 WRIT PETITION No. 1737 of 2011