तेरे जाने का इसलिए कोई गिला भी नहीं,
तेरा नाम मेरे दिल से कभी गया ही नहीं।
हमने चाहा था जिसे टूटकर, वो अपना न हुआ,
फिर भी उस शख़्स से दिल कभी ख़फ़ा न हुआ।
तुम्हें भूलने की कोशिश में उम्र गुज़र गई,
अजीब बात है, मोहब्बत मगर वहीं ठहर गई।
न कोई वादा रहा, न मिलने की आस रही,
फिर भी दिल में तेरे होने की एक बात रही।
तुम्हारे बाद किसी से दिल लगाया ही नहीं,
शायद इस दिल ने तुम्हें अपना आख़िरी माना था।
जो बात लफ़्ज़ों में कभी कह नहीं सके तुमसे,
वही ख़ामोशी उम्र भर हमारा हाल कहती रही।
तुम खुश रहो, यही इश्क़ की आख़िरी शर्त रही,
हमारे हिस्से में चाहे उम्र भर की तन्हाई रही।
किसी के लौट आने से मोहब्बत पूरी नहीं होती,
गर पूरी होती, तो सिर्फ ज़िंदगी पूरी होती है।
वो शख़्स दूर है, फिर भी दिल के पास है मेरे,
कुछ रिश्ते फ़ासलों से कभी ख़त्म नहीं होते।
By Ajay Gautam
