OnlineNewsPortal.In is a leading online news portal providing the latest news, articles, expert insights, updated knowledge, business, technology, health, sports, entertainment, and lifestyle information

News And Articles To Read

कर्म: प्रकृति का न्याय Karma: The Justice of Nature

कर्म: प्रकृति का न्याय Karma: The Justice of Nature

मैंने न बद्दुआ दी,
न कोई साज़िश रची,
मैं तो बस समय के न्याय पर
चुपचाप विश्वास किए बैठा हूँ।

जो बीज तुमने बोए थे,
अब वही वृक्ष बनकर खड़े हैं,
उनकी छाया भी तुम्हारी है,
और उनके काँटे भी तुम्हारे हैं।

तुमने शब्दों में ज़हर घोला,
विचारों में अहंकार पाला,
आचरण से विश्वास तोड़ा,
फिर भाग्य को दोष क्यों डाला?

कर्म कभी जल्दबाज़ नहीं होते,
पर अंधे भी नहीं होते।
वे हर हिसाब रखते हैं,
हर पल का लेखा लिखते हैं।

मैंने तो केवल दूरी चुनी,
समय ने निर्णय सुनाया है।
जिसे तुम किस्मत समझ रहे हो,
वह तुम्हारे कर्मों का साया है।

आज जो टूट रहा है,
वह किसी और की जीत नहीं,
तुम्हारे अपने ही निर्णयों की
धीमी, मगर निश्चित हार है।

इसलिए अब न शिकायत है,
न कोई प्रतिशोध बाकी है।
बस एक मौन सत्य सामने है—
मनुष्य अपने कर्मों से हारता है,
दूसरों से नहीं।

पर सबसे बड़ा सच ये है—
इसमें मेरा कोई काम नहीं है।
क्योंकि उसमें मेरी नहीं,
तुम्हारे विचार, तुम्हारे आचरण,
और तुम्हारे कर्मों की ही परछाई है।

By Ajay Gautam