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मध्यप्रदेश में 17 सितंबर से बड़ा स्वामित्व अभियान, 50 लाख से अधिक ग्रामीणों की संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री का लक्ष्य

मध्यप्रदेश में 17 सितंबर से बड़ा स्वामित्व अभियान, 50 लाख से अधिक ग्रामीणों की संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री का लक्ष्य

मध्यप्रदेश सरकार 17 सितंबर से ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में संपत्ति के मालिकाना हक को मजबूत करने के लिए ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन अभियान-2026’ शुरू करने जा रही है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा और इसका उद्देश्य स्वामित्व योजना के तहत तैयार अधिकार अभिलेखों का निःशुल्क पंजीयन कर ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति का अधिक मजबूत कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराना है।

राज्य सरकार के अनुसार अभियान के दौरान 50 लाख से अधिक ग्रामीण आबादी को मुफ्त रजिस्ट्री का लाभ देने की तैयारी है। इसके लिए जिलों और तहसीलों में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टरों को अभियान की लगातार निगरानी करने और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

इस पहल का सीधा संबंध केंद्र सरकार की SVAMITVA (Survey of Villages and Mapping with Improvised Technology in Village Areas) योजना से है। इस योजना के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्रों का ड्रोन सर्वे कर उच्च-सटीकता वाले नक्शे तैयार किए जाते हैं और उनके आधार पर संपत्ति मालिकों के अधिकार अभिलेख एवं प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जाते हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण संपत्ति के मालिकाना हक को स्पष्ट करना और जमीन-संपत्ति से जुड़े विवादों को कम करना है।

मध्यप्रदेश ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। केंद्र सरकार के SVAMITVA पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य में 43,014 गांव अधिसूचित किए गए हैं, जबकि 40,821 गांवों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और 62,07,510 प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा चुके हैं।

फरवरी 2026 में केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक भी मध्यप्रदेश में उस समय तक 39,474 गांवों में प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा चुके थे और 65,65,879 कार्ड तैयार किए गए थे। बाद के पोर्टल आंकड़े राज्य में योजना के विस्तार को दर्शाते हैं।

स्वामित्व योजना का एक महत्वपूर्ण फायदा यह है कि ग्रामीण संपत्ति के स्पष्ट रिकॉर्ड का इस्तेमाल बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है। केंद्र सरकार के अनुसार SVAMITVA प्रॉपर्टी कार्ड के आधार पर देश में हजारों ऋण वितरित किए जा चुके हैं। अगस्त 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों में मध्यप्रदेश से जुड़े 2,202 ऋणों के लिए करीब ₹177.77 करोड़ की राशि वितरित होने की जानकारी दी गई थी।

मध्यप्रदेश के नए अभियान में डीड ऑफ कन्वेयंस के निष्पादन और पंजीयन पर शुल्क नहीं लेने की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। इससे उन ग्रामीण परिवारों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनके अधिकार अभिलेख पहले ही स्वामित्व योजना के तहत तैयार हो चुके हैं, लेकिन उनका औपचारिक पंजीयन अभी बाकी है।

अभियान में पंचायत और स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी अहम होगी। उपलब्ध योजना संबंधी जानकारी के अनुसार आधार ई-केवाईसी, भूमि रिकॉर्ड लिंकिंग तथा संबंधित डिजिटल सरकारी प्रणालियों के माध्यम से प्रक्रिया को पूरा करने की तैयारी है। प्रशासनिक स्तर पर पटवारियों और अन्य मैदानी कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

सरकार के लिए यह अभियान केवल रजिस्ट्री कराने तक सीमित नहीं है। ग्रामीण संपत्तियों के स्पष्ट और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से भविष्य में संपत्ति विवादों में कमी, बैंक ऋण तक बेहतर पहुंच और ग्रामीण संपत्ति को औपचारिक आर्थिक परिसंपत्ति के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। यही SVAMITVA योजना का व्यापक उद्देश्य भी है।

17 सितंबर से शुरू होने वाला अभियान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मध्यप्रदेश में पहले से बड़े पैमाने पर ड्रोन सर्वे और प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा चुके हैं। अब सरकार का फोकस इन अभिलेखों को अंतिम रूप देकर ग्रामीण परिवारों के हाथ में अधिक प्रभावी और पंजीकृत संपत्ति अधिकार पहुंचाने पर है।