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है नमन, जिनके आशीष से हम फले-फूले

है नमन, जिनके आशीष से हम फले-फूले,
जिनकी दुआओं ने हर मोड़ पर हमें संभाला।
जब राहों में अँधेरा था और मन डगमगाया,
जिनके विश्वास ने बनकर दीपक पथ उजाला।

है नमन, जिनके आशीष से हम फले-फूले,
जिनकी कृपा से हर अँधियारे ने उजियारा पाया।
निराशा की धूल जब सपनों पर बिखरने लगी,
जिनके स्नेह ने हर आशा को फिर से जगाया।

है नमन, जिनके आशीष से हम फले-फूले,
जिनकी सीख ने जीवन को सच्चा मार्ग दिखाया।
सत्य, धैर्य और कर्म का अमूल्य पाठ देकर,
जिन्होंने हर कठिन क्षण में आगे बढ़ना सिखाया।

है नमन, जिनके आशीष से हम फले-फूले,
जिनके विश्वास ने हर ठोकर को अवसर बनाया।
हार को भी साहस की नई परिभाषा देकर,
जिन्होंने गिरते कदमों को फिर से चलना सिखाया।

है नमन, जिनके आशीष से हम फले-फूले,
जिनकी ममता ने सूखे मन में स्नेह का सागर बहाया।
थके हुए जीवन को अपनत्व की छाया देकर,
जिन्होंने हर रिश्ते का सच्चा अर्थ समझाया।

है नमन, जिनके आशीष से हम फले-फूले,
जिनके संस्कारों ने हमें हर परीक्षा में जिताया।
ईमान, विनय और सेवा का अमृत देकर,
जिन्होंने चरित्र को जीवन का सबसे बड़ा धन बनाया।

है नमन, जिनके आशीष से हम फले-फूले,
जिनकी प्रेरणा ने संघर्ष को भी उत्सव बनाया।
काँटों से भरी राहों में भी मुस्कान बोकर,
जिन्होंने हर चुनौती को संकल्प का गीत बनाया।

है नमन, जिनके आशीष से हम फले-फूले,
जिनकी छाया ने धूप में भी शीतलता का एहसास कराया।
जब समय ने हर ओर से धैर्य की परीक्षा ली,
जिन्होंने स्नेह का आँचल बनकर हमें सहारा दिलाया।

है नमन, जिनके आशीष से हम फले-फूले,
जिनके आशीर्वचनों ने हर कठिन राह को सरल बनाया।
ऐसे पूज्य जनों के चरणों में शत-शत वंदन,
जिनके कारण जीवन ने अपना सच्चा अर्थ पाया।

By Ajay Gautam