अब जब तुम चले गए हो, दिल ये कहता है,
इस वीरान दिल में तुम्हारे नाम की बेंच लगवा दूँ।
इस खालीपन में एक याद का बसेरा होगा,
तुम्हारे नाम की बेंच पर सिर्फ ज़िक्र तेरा होगा।
जिस रास्ते से तुम लौटकर कभी आए नहीं,
हम आज भी उसी राह पर शामें गुजारते हैं।
तेरे नाम को मिटाने चले थे दिल की दीवार से,
हाथ काँप गए और दिल ने कहा—ये घर है, मकान नहीं।
तुम्हें भूलने की कोशिश तो बहुत की हमने,
हर कोशिश के बाद तुम्हें और याद किया हमने।
तुम गए तो शहर वही था, मगर सब सूना लगा,
तुम्हारे बाद अपना ही घर हमें बेगाना लगा।
तुमसे बिछड़कर ये जाना हमने,
कुछ लोग दूर होकर भी दिल से दूर नहीं होते।
जिसे अपना समझकर उम्र भर संभालना था,
वही शख़्स हमें उम्र भर का इंतज़ार दे गया।
By Ajay Gautam
