कभी ख़ुद से मिले तो सवालों में उलझ गए,
किस राह पर चलें, इसी कशमकश में रुक गए।
उसे चाहें या अपनी ख़ुद्दारी बचा लें हम,
यही सोचकर हर रोज़ थोड़ा-थोड़ा टूटे हम।
कुछ रिश्ते छोड़ना भी आसान नहीं होता,
कुछ रिश्तों में रहना भी आसान नहीं होता।
न उसे भूल पाए, न अपना बना सके,
कशमकश-ए-इश्क़ में बस ख़ुद को गँवा सके।
By Ajay Gautam
