कितना अच्छा होता,
हमें जिंदगी के दिन पता होते,
फिर हम शायद रूठते नहीं,
धोखा नहीं देते,
या तो सिर्फ अपने लिए जीते,
या फिर आपनो के लिए,
जिद्दोजहत होती इसे यादगार बनाने की।
और उससे भी अच्छा होता,
यदि हमें रिश्तों की उम्र पता होती,
इससे जिंदगी के बचे दिन,
कुछ और बच जाते।
खुद के लिए कुछ वक़्त निकल जाता,
तब नियति से कुछ शिकायत नहीं होती।
By Ajay Gautam
